हरियाणा के पूर्व पुलिस उपनिरीक्षक रमेश्वर आज़ाद ने हाल ही में वरिष्ठ अधिकारियों पर गंभीर उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं, जो न केवल उनके व्यक्तिगत अनुभव से जुड़ा मामला है बल्कि राज्य की पुलिस व्यवस्था में गहरे समस्याओं का संकेत भी देता है। रमेश्वर आज़ाद ने बताया कि ड्यूटी के दौरान उन्हें एक दुर्घटना में हाथ खोना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उन्हें तत्काल राहत या उचित छुट्टी नहीं दी गई। इसके साथ ही उनका वेतन रोका गया और अन्य अनुचित कार्रवाइयों का सामना करना पड़ा। उनका कहना है कि यह केवल व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि इस तरह की घटनाएं हरियाणा पुलिस में आम हो चुकी हैं, जो कर्मचारियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं।
रमेश्वर आज़ाद ने बताया कि पुलिस विभाग में कर्मचारियों के उत्पीड़न की घटनाओं का सिलसिला लंबे समय से चला आ रहा है। अधिकारी अक्सर वरिष्ठ पदों के दबाव में निर्णय लेते हैं और सामान्य कर्मचारियों के लिए न्याय सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि ड्यूटी पर घायल हुए कर्मचारियों को उचित सम्मान और समर्थन प्रदान करना केवल उनके कर्तव्य का हिस्सा नहीं, बल्कि यह मानवाधिकारों और मूलभूत नैतिक जिम्मेदारियों का भी प्रश्न है। उनके अनुसार, इस तरह के व्यवहार से कर्मचारियों में निराशा और अविश्वास की भावना पैदा होती है।
पूर्व उपनिरीक्षक ने यह भी स्पष्ट किया कि पुलिस विभाग में सुधार की बहुत आवश्यकता है। उनका कहना है कि जब तक कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाएगा और उनके लिए उचित सुरक्षा और लाभ सुनिश्चित नहीं किए जाएंगे, तब तक विभाग में सुधार असंभव है। उन्होंने उदाहरण के रूप में कहा कि कई सहकर्मी मानसिक दबाव और अत्यधिक काम के कारण अवसाद और मानसिक रोगों का शिकार हो चुके हैं। कुछ मामलों में, निराश कर्मचारियों ने आत्महत्या तक कर ली है।
रमेश्वर आज़ाद ने अपनी कहानी साझा करते हुए बताया कि उन्हें घायल होने के बाद कई दिनों तक इलाज के लिए उचित सुविधा नहीं मिली। उनके अधिकारियों ने उनके अनुरोधों और शिकायतों को नजरअंदाज किया। उन्हें न केवल नियमित वेतन में देरी का सामना करना पड़ा बल्कि उनके सेवा रिकॉर्ड में भी कई अवांछनीय नोट्स दर्ज कर दिए गए। इस प्रकार की कार्रवाई ने उन्हें व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों ही रूप से प्रभावित किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के उत्पीड़न और अनदेखी की घटनाओं से पुलिस विभाग की कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जब कर्मचारी सुरक्षित और सम्मानित महसूस नहीं करते हैं, तो उनका मनोबल गिरता है और उनकी कार्यकुशलता प्रभावित होती है। इसके परिणामस्वरूप आम जनता को मिलने वाली सुरक्षा और न्याय की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
रमेश्वर आज़ाद ने यह भी कहा कि पुलिस सुधार केवल व्यक्तिगत मामलों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए व्यापक नीति सुधार और प्रशिक्षण की आवश्यकता है। अधिकारीयों को कर्मचारियों के अधिकारों और उनके कल्याण के महत्व को समझना होगा। उन्हें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि घायल या पीड़ित कर्मचारियों को तुरंत चिकित्सा सुविधा, मानसिक सहायता और वित्तीय सहायता प्राप्त हो।
उन्होंने सुझाव दिया कि पुलिस विभाग में एक स्वतंत्र निगरानी समिति बनाई जाए, जो कर्मचारियों के उत्पीड़न और अन्य समस्याओं की जांच करे। इस समिति को शिकायतों का त्वरित समाधान करने का अधिकार होना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई भी अधिकारी कर्मचारियों के साथ अन्याय न कर सके।
इसके अलावा, रमेश्वर आज़ाद ने कहा कि प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मानवाधिकार और कर्मचारियों के कल्याण को शामिल करना चाहिए। अधिकारी और कर्मचारियों को यह समझाया जाना चाहिए कि किसी भी कर्मचारी के साथ अनुचित व्यवहार केवल व्यक्तिगत अपराध नहीं है, बल्कि यह पूरे विभाग और समाज के लिए हानिकारक है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मीडिया और समाज की जागरूकता इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जब जनता पुलिस विभाग की कमियों और उत्पीड़न की घटनाओं को जानती है, तो यह अधिकारियों पर जिम्मेदारी डालता है कि वे सुधारात्मक कदम उठाएं।
रमेश्वर आज़ाद के अनुसार, पुलिस विभाग में सुधार की दिशा में तीन प्रमुख कदम उठाए जाने चाहिए:
1. कर्मचारियों के लिए त्वरित राहत और वित्तीय सहायता – घायल या पीड़ित कर्मचारियों को तुरंत चिकित्सा और वित्तीय सहायता मिलनी चाहिए।
2. स्वतंत्र निगरानी और शिकायत निवारण समिति – इस समिति के माध्यम से कर्मचारियों के उत्पीड़न की घटनाओं का त्वरित और निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
3. प्रशिक्षण और जागरूकता – अधिकारियों और कर्मचारियों को उनके अधिकारों, कर्तव्यों और नैतिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर इन सुधारों को लागू नहीं किया गया, तो न केवल पुलिस विभाग का मनोबल गिरता रहेगा, बल्कि आम जनता के लिए सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करना भी कठिन हो जाएगा। उनके अनुसार, यह समय की मांग है कि पुलिस विभाग अपने कर्मचारियों की भलाई और सम्मान को प्राथमिकता दे।
रमेश्वर आज़ाद ने अंत में कहा कि उनका उद्देश्य केवल व्यक्तिगत शिकायत करना नहीं है। उनका उद्देश्य यह है कि पूरे हरियाणा पुलिस विभाग में कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा की जाए और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएँ। उन्होंने अधिकारियों से अपील की कि वे कर्मचारियों के कल्याण के लिए गंभीरता से काम करें और सुधार की दिशा में तत्पर रहें।
इस प्रकार, रमेश्वर आज़ाद की कहानी न केवल उनके व्यक्तिगत अनुभव को उजागर करती है, बल्कि यह पूरे हरियाणा पुलिस विभाग में सुधार की आवश्यकता को भी स्पष्ट रूप से दर्शाती है। उनका संदेश स्पष्ट है कि जब तक कर्मचारियों का सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी, तब तक पुलिस विभाग की कार्यक्षमता और आम जनता के लिए न्याय सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण रहेगा।
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